Chania

नाम - अरुण कुमार बजाज

पद - थ्रेड वर्क आर्टिस्ट

जन्म की तारीख - 2 जून 1983

स्थान - पटियाला

सिलाई मशीन से सामान्यतौर पर कपड़े सिले जाते हैं, एंब्रायडरी कर कपड़ों पर कुछ फूल व अन्य तरह की डिजाइन बनाई जाती है, लेकिन यदि कोई इससे चित्रकारी शुरू कर दें तो क्या कहेंगे। पटियाला के अरूण कुमार बजाज, ऐसे ही कलाकार हैं। अपनी तरह के एकमात्र इस कलाकर ने बीते छह साल में ऐसी सफलता पाई कि दुनिया आज उसे नीडल मैन के नाम से जानती है। ऐसा नीलडमैन जो जब सिलाई मशीन पर बैठे तो कपड़े पर तस्वीरें उभरने लगती है। ऐसी, जैसे अभी बोलने लगेगी। ये कोई परंपरागत चित्रकारी नहीं है, एक नवाचार है और इसे देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी माना। उन्होंने इनोवेशन पुरूस्कार दिया। शुरुआती दिक्कतों और परेशानियों को पार कर अब बजाज सफलता की राह पर सरपट दौड़ रहे हैं। देश का नाम दुनिया में रोशन करने को तैयार है।
बजाज को बचपन में स्कैचिंग का शौक था। वे स्कूल में पढ़ाई कम और स्कैचिंग अधिक करते थे। पढ़ाई में मन नहीं लगता था। हालांकि पिता हमेशा पढ़ाई पर जोर देते थे। पिता शिक्षक थे और साथ ही टेलरिंग की शॉप भी चलाते थे। पिता अपने बेटे की सफलता नहीं देख पाए। वर्ष 2000 में जब अरूण महज 16 वर्ष के थे, तब पिता का देहांत हुआ और यहीं से इनके जीवन के संघर्ष भी शुरू हुए। पिता के जीवित रहते हुए ही 12 वर्ष की उम्र में दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था। पढ़ाई में अरूचि और पिता के देहांत की वजह से वे सिर्फ मैट्रिक तक ही पढ़ाई कर सके। अरूण को एंब्रायडरी करने का शौक था और आसपास के दुकानदारों को देखकर इसे सीखा। पिता के जाने के बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ी, लेकिन मन में कुछ अलग, कुछ नया करने का जुनून सवार हो गया। पिता के जाने के बाद खुद को मजबूत किया।
बजाज गुरुनानक देव जी को अपनी नई कला की प्रेरणा बताते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सपना देखा कि एंब्रायडरी से गुरुनानक देव जी का चित्र बना रहे हैं। आंख खुली, लेकिन दिमाग नानक देव जी का चित्र बनाने में ही लगा रहा। कोई ट्रेनिंग नहीं थी, लेकिन नानकदेव जी का आशीर्वाद मानकर काम शुरू किया। सिलाई मशीन से सात दिन में नानकदेव जी का चित्र तैयार किया। इसे काफी सराहना मिली तो उत्साह बढ़ा।
बजाज का नाम विश्व रिकॉर्ड्स की किताबों में भगवान श्री कृष्ण के चित्र ने दर्ज कराया। तीन साल से अधिक समय में ये तैयार हुआ। छह फीट लंबा और चार फीट चौड़े इस चित्र को बजाज अपने जीवन का सबसे बेहतरीन काम बताते हैं। इसे बनाने में 28 लाख 30 हजार मीटर धागा लगा। 17 साल पहले इसे तैयार किया था और इसके आधार पर गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड, लिम्का बुक और अन्य रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हुआ।

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बजाज वर्ष 2009 से 2013 तक पूरी तरह गुमनाम रहे। घर परिवार चलाने की चिंता, कुछ नया- हटकर करने का मन और पुराने काम काज में मंदी। बजाज के सामने इनकी दिक्कतें रही। स्थिति ये रही कि वे 2009 से 2013 के बीच पूरी तरह गुमनामी जिंदगी में चले गए। वे एक दरगाह के पास जाकर घंटों ही बैठे रहते थे। यहीं से उन्हें फिर से खुद को बाहर निकालने और साबित करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने काम शुरू किया और दुनिया उन्हें अब नीडल मैन के नाम से जानती है।
बजाज ने मशीन से कपड़े पर बनाई कलाकृतियों को दिल्ली के प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी में रखा। नवंबर 2013 में यहां नौ कलाकृतियां रखी। लोगों ने इन्हें काफी सराहा। पसंद किया, लेकिन कोई बिकी नहीं। लोगों को ये पसंद आई, उनकी सराहना मिली, इससे उनका उत्साह बढ़ा।
प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी में 120 देशों के कलाकार शामिल हुए थे। बजाज ने यहां इनके बीच चुनौती रखी कि उनकी तरह सिलाई मशीन से कपड़े पर चित्रकारी वाला काम कोई कर रहा हो तो वे उसे 50 हजार रुपए का इनाम देंगे। इस चुनौती से वे मीडिया की सुर्खियों में आए। उनके काम को अधिकाधिक लोगों ने देखा। बजाज का कहना है कि वे सिंगल टांके से जैसी सामान्य एंब्रायडरी होती है, उससे ही चित्र बनाते हैं।
इसके बाद फरवरी 2014 में हरियाणा में एक प्रदर्शनी में अपने चित्र रखे। यहां उनके कुछ चित्र बिके। उनको इससे पहली दो लाख रुपए की कमाई हुई। इसके बाद वे लगातार कई प्रदर्शनियों में अपने चित्र ले गए। स्थिति ये हुई कि इनकी अनोखी कलाकारी की खबर प्रधानमंत्री- राष्ट्रपति तक को मिली। उनसे मुलाकात भी हुई। बजाज को इनोवेशन अवार्ड भी राष्ट्रपति के द्वारा दिया गया। अब तक प्रदर्शनी वाले इन्हें आगे रहकर आमंत्रित करते हैं।
बजाज ने अपनी कलाकृतियों को दुनिया के सामने लाने ऑनलाइन चैनल का सहारा लिया। उन्होंने अपने काम काज से जुड़े वीडियो बनाकर शेयर करना शुरू किया। लोग उनसे जुडऩे लगे। स्थिति ये हैं कि उन्हें चित्र बनाने के ऑर्डर भी ऑनलाइन मिलता है और भुगतान भी ऑनलाइन ही हो जाता है। उनका महाराजा रणजीतसिंह दरबार चित्र काफी पसंद किया गया। ये 11 लाख रुपए में बिका। इसको जब ऑनलाइन अपलोड किया तो इसे 21 लाख व्यू मिले। बजाज के लिए ये भी उत्साहवद्र्धक था।
बजाज कहते हैं कि वे सिंगल टांगे वाली एंब्रायडरी से ही चित्र बनाते हैं। वे कभी भी चित्र को चेहरे से नहीं बनाते। पैरों से शुरू करते हुए उपर की ओर लाते हैं। आखिर में चेहरा बनाते हैं। वे इस कला के अपनी तरह के पहले और एकमात्र कलाकार हैं। वे चाहते हैं कि ये कला अब आगे बढ़े, दूसरे लोग भी इसे सीखे। वे सरकार से इसके लिए जगह और जरूरी मदद का निवेदन कर चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है। बजाज का कहना है कि एक तीन फीट के पोट्रेड में पांच माह का समय लग जाता है।
बजाज का कहना है कि कमजोर आर्थिक स्थिति होने पर भी वे अपने काम और संकल्प के प्रति दृढ़ संकल्पित रहे। वे काम छोडऩे का कोई बहाना नहीं चाहते थे। घर परिवार चलाने उधार भी लिया, लेकिन काम नहीं छोड़ा। संघर्ष, दृढ संकल्प और काम के प्रति जुनून ही है जिससे आज दुनिया में वे नीडल मैन के तौर पर विख्यात हो चुके हैं। उन्होंने खुद ही अपना नाम नीडल मैन रखा और अब यही इनकी पहचान है।
बजाज अपने पिता का नाम रोशन करना चाहते थे। वे कुछ नया, हटकर करना चाहते थे। समाज में एक अलग पहचान बनाने का जुनून था। इससे ही उन्हें सिलाई मशीन से कलाकारी शुरू की। काम के प्रति समर्पण इतना कि कई बार 72 घंटे तक बिना कुछ खाए पीएं काम करते रहे। इसमें उनकी पत्नी व परिवार का पूरा सहयोग मिला।
बजाज अब तक 250 से अधिक चित्र बना चुके हैं। वे कहते हैं कि अब लागों को उनपर भरोसा हो गया है। कई लोग अपने परिवार के चित्र बनवा रहे हैं। उनके काम को मान्यता मिली तो 2018 के बाद स्थिति सुधरी। चित्र बिकने लगे, नए ऑर्डर मिलने लगे। देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक उन्हें सम्मानित करने लगे। वे कहते हैं कि उन्हें राष्ट्रपति द्वारा जल्द ही फिर सम्मानित किया जाएगा।
बजाज मशीन एंब्रायडरी से चित्रकारी के अपने काम को बकायदा पेटेंट करा चुके हैं। उनका कहना है कि वे इस तरह का काम करने वाले देश के पहले व्यक्ति हैं। अगले 12 साल तक के लिए उनके नाम ये पेटेंट हो चुका है। अब वे अधिकृततौर पर कहते हैं कि उनके जैसा कलाकार देश कोई दूसरा नहीं है।
बजाज कहते हैं कि किसी को अपने धैर्य की परीक्षा लेना है तो पानी की बूंद- बूंद टपकते नल के नीचे बॉटल लेकर खड़ा हो जाए। बूंद बंद से जब तक बॉटल भरें तब तक कोई खड़ा रह सके, ऐसा धैर्य सफलता के लिए जरूरी है। इसके साथ अपना लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। सफलता पाने के लिए समय काफी लगता है, लेकिन आपकी कोई भी मेहनत बेकार नहीं जाती। मेरा दिन भी आएगा, यही सोचकर काम करना चाहिए। वे अपनी बात एक शेर से समझाते हैं
  • 4 फरवरी, 2015 को उनकी अनूठी भगवान कृष्ण की कढ़ाई के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स |
  • अरुण कुमार बजाज को 'द नीडलमैन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है।
  • अद्वितीय सिलाई मशीन धागा कला में अनोखा विश्व रिकॉर्ड |
  • भारतीय आदिवासी महिलाओं ने अपने बेबी एम्ब्रायडरी पोर्ट्रेट के साथ लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड जीता।
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