Successful Indian - successfullindian

नाम - गुलाबो सपेरा

पद - लोक कलाकार कालबेलिया

जन्म तिथि - 1970

स्थान - राजस्थान

एक व्यक्ति की सफलता उसे या उसके परिवार ही नहीं, उसके पूरे समुदाय- जाति को नाम और सम्मान दिला सकती है, राजस्थान की कालबेलिया नृत्यांगना गुलाबो सपेरा इसका जीवंत उदाहरण है। समुदाय की कुपृथा की वजह से जम्म के साथ ही जमीन में गाढ़ दी गई गुलाबों सपेरा जीवन के तमाम झंझावतों और समाज की कुरीतियों से लड़ते हुए अपने कालबेलिया नृत्य के बल पर आज सफलता के शिखर है। स्थिति ये हैं कि जो समान उनकी जिंदगी ही नहीं चाहता था आज वह उनके नाम से पूरे विश्व में मान और सम्मान पा रहा है। गुलाबो सपेरा के संघर्षों और सफलता की ही वजह है कि जंगल और सांपों के बीच में रहने वाले उनके कालबेलिया समुदाय के लोग आज शहरी और आधुनिक जीवन की ओर बढ़ चले हैं। अच्छी पढ़ाई के साथ प्रगति के पथ पर हैं। गुलाबो सपेरा अब बेटी पढ़ाओ- बेटी बढ़ाओ के नारे को बुलंद कर रही हैं। साथ ही वह अपने समुदाय की अध्यक्ष के नाते समाज को बेहतर- शिक्षित बनाने के लिए भी काम कर रही हैं। अपनी नृत्यशैली से अन्य लोगों को परिचित कराने और इसके विधिवत प्रशिक्षण के लिए अकादमी खोल रही है। गुलाबो सपेरा को उनकी विशिष्ट नृत्य शैली और कला में योगदान पर पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
गुलाबो सपेरा का जन्म अजमेर जिले में 1970 में कालबेलिया समुदाय के सपेरा परिवार में हुआ। वे माता- पिता की सातवीं संतान है। उनसे पहले तीन बहनें और तीन भाई हैं। बेटियों को जन्म लेते ही जमीन में गाढ़कर मार देने की समाज की कुरीति की शिकार वह भी हुई। जन्म लेते ही समाजजनों ने उन्हें जमीन में गाढ़ दिया। शाम सात बजे का समय था। मां को होश आया और पूछताछ की तो इसका पता चला। मां नहीं मानी, अपनी बहन के साथ रात को उस जगह पहुंची और बेटी को जमीन से निकाला। गुलाबो की सांसे चल रही थी। समाज के विरोध के बावजूद मां ने गुलाबो को बचाया और पाला- पोसा।
सबसे छोटी बेटी गुलाबो को पिता अपने साथ बाजार में ले जाते थे। सांप नचाने का बाजार में प्रदर्शन करते, यही उनकी रोजी रोटी का जरिया था। समाजजन कहीं बेटी को मार न दें, इस डर से वे बेटी को नाग नृत्य प्रदर्शन के दौरान साथ रखते थे। गुलाबो सपेरा बताती हैं कि जब बिन की धुन पर नाग नृत्य करते थे तो वह भी नाचने लगती। नृत्य उन्हें ईश्वर ने ही दिया है। हालांकि उनके समाजजनों को लड़की का इस तरह नाचना अच्छा नहीं लगता था। इसपर विरोध सहा और आखिर में पिता ने उन्हें नाग नृत्य में साथ रखना बंद कर दिया।
गुलाबो सपेरा बताती हैं कि उनका समुदाय घुम्मक्कड हैं। मेलों में जाना, प्रदर्शन करना उन लोगों का पेशा हैं। ऐसे में वे लोग पुष्कर के मेले में पहुंचे थे। तब वे काफी छोटी थी। यहां लोगों के सामने अपने विशेष कालबेलिया नृत्य को बताया। इसे लोगों ने पसंद किया और पैसे भी दिए। पैसे मिले तो वे यहां रोजाना नृत्य दिखाने लगी। इसी समय राजस्थान के पर्यटन विभाग के कुछ अफसरों की नजर उनपर गई। उन्होंने अपने प्रोग्राम में आकर ये नृत्य दिखाने का निवेदन किया। गुलाबो मान गई। उनके साथ मंच पर प्रस्तुति दी और यहीं से उनका कालबेरिया नृम्यांगना के तौर पर कैरियर शुरू हुआ। इसके बाद फिर समाज ने विरोध किया। उन्होंने गुलाबो सपेरा के पिता को समाज से बाहर कर दिया था। बात में काफी मान मनौव्वल करने के बाद उन्हें समाज में लिया गया। सरकारी अफसरों और प्रबुद्धजनों ने गुलाबो के पिता को समझाया। वे गुलाबो के पक्ष में रहे। वे अपने भाई को लेकर जयपुर मंच पर प्रस्तुति देने पहुंची।
गुलाबो सपेरा का कहना है कि कालबेलिया नृत्य कोई पारंपरिक कला नहीं है। ये उनकी ही शैली है। इसके गीत से लेकर धुन सब उन्होंने ही बनाएं। अपने समाज के विभिन्न कामों पर आधारित इसकी शैली है। कपड़ों में भी उनके समुदाय की शैली का उपयोग किया गया। अपने समुदाय के पहनावे, जेवर को ही ध्यान में रखकर नृम्य के लिए वेशभूषा- आभूषण तैयार किए। गुलाबो सपेरा कहती हैं देश की पुरानी नृत्य शैलियों से कालबेलिया नृत्य की तुलना ठीक नहीं। वे सभी पुरातन शैलियां है, जबकि कालबेलिया नृत्य की उत्पत्ति तो उन्होंने ही की है। वे बताती हैं कि नृत्य उनके रक्त में इस तरह रचा बसा है कि यदि वे बीमार हो और नाच लें तो बुखार उतर जाता है। ये ईश्वरीय ईनाम हैं।

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गुलाबो सपेरा देश के साथ ही विदेशों में भी अपनी विशेष शैली के नृत्य से विख्यात है। राजस्थान के सरकारी आयोजनों, कला मंचों से होते हुए राष्ट्रीय मंचों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विशेष शैली के कालबेलिया नृत्य को प्रस्तुत किया। अमेरिका में उन्होंने प्रस्तुति देकर देश का गौरव बढ़ाया। फ्रांस में तो उनपर किताब तक लिखी गई हैं। अमेरिका में उनसे पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीवगांधी मिले, गायिका लता मंगेशकर मिली और उनके नृत्य की तारीफ की। पूरे मन से कालबेलिया नृत्य करने वाली गुलाबो सपेरा को लगातार मौके मिले और वे सफलत के शिखर पर चढ़ती गई। दिक्कतों को उन्होंने अवसरों में बदल दिया।
गुलाबो सपेरा की कालबेलिया नृत्य शैली इतनी विशेष और आकर्षक है कि बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों के साथ हॉलीवुड में भी फिल्मों में उपयोग किया गया। इसके साथ ही अभिनेता धर्मेंद्र की फिल्म बंटवारा, अमिताभ की अजूबा समेत कई फिल्मों में उनका नृत्य शामिल किया गया। हॉलीवुड फिल्म फॉर फैमिली में भी उनका नृत्य है। कई टीवी धारावाहिकों में भी उनका प्रदर्शन हैं।
दूरदर्शन के मिले सुर मेरा तुम्हारा वाले गाने में गुलाबो सपेरा का एक नृत्य दृश्य था। इसे अभिनेत्री हेमा मालिनी ने देखा। हेमा मालिनी को ये इतना पसंद आया कि, गुलाबो से इसे सीखने का आग्रह किया। गुलाबो ने हेमा मालिनी को ये नृत्य सिखाने की मंजूरी दी। हेमा नृत्य सीखने जयपुर पहुंची। यहां गुलाबो सपेरा के साथ साढ़े चार घण्टे तक मुलाकात चली। हेमा 3 घण्टे तो गुलाबो सपेरा का नृत्य देखती रही, डेढ़ घण्टे इसे सीखने में लगाए।
गुलाबो सपेरा अभी जयपुर में रहती हैं। वे अपने घर पर लड़कियों को इस नृत्य शैली के बारे में सिखाती है, लेकिन अब अजमेर में इसके लिए विधिवततौर पर गुलाबो सपेरा नृत्य अकादमी खोलने जा रही हैं। इसके लिए भवन तैयार हैं। कोरोना की वजह से अभी अकादमी शुरू नहीं हो पाई। जल्द ही वे इसे शुरू करेगी।
गुलाबो सपेरा को उनके कला क्षेत्र में योगदान की वजह से जयपुर साहित्य महोम्सव 2021 में शामिल किया गया। गुलाबो सपेरा का कहना है कि यहां कई बड़े कलाकार आए, जिनसे मिलने का मौका मिला, जो उनके लिए बेहद सुखद हैं। ऐसे मंच और कार्यक्रम होते रहने चाहिए, ताकि कलाकारों को नया सिखने और अन्य कलाकारों से मिलने का मौका मिलता रहे।
गुलाबो सपेरा का कहना हैं कि उनकी अमेरिका यात्रा के बाद से समाजजनों में अहसास हुआ कि वह अच्छा कर रही है। समाज की तरक्की होगी। इसके बाद कुरीतियां- कुप्रथाओं को खत्म करने का सिलसिला शुरू हुआ। अब कालबेलिया समाज के लोग शहरी जीवन की ओर बढऩे लगे। पहले लोग कालबेलिया समुदायजनों से छुआछुत रखते थे, अब ऐसा नहीं है। वे अब समाज की अध्यक्ष है। उनका कहना है कि समाज के लिए कुछ अच्छा करना हैं। कलाकारों के लिए भी वे लड़ाई लडऩा चाहती हैं। वे कहती हैं कि खुद के अलावा अन्य लोगों के लिए भी काम करना चाहिए।
गुलाबो सपेरा का कहना है कि नए उभरते कलाकारों को कला से लाभ हानि के बारे में नहीं सोचना चाहिए। जब तक वे कला में डूबेंगे नहीं, सफलता नहीं मिलेगी। वे कहती हैं खुद का लक्ष्य तय करें और धैर्य के साथ अपनी कला को ईश्वर मानकर उसकी पूजा करें। उसमें विश्वास रखें।
गुलाबो सपेरा का कहना है कि किसी व्यक्ति की सफलता उसकी खुद की सफलता नहीं होती। वह अपने परिवार, समाज, राज्य और देश का नाम कर सकता हैं। जब तक आप ऐसा नहीं करते, सफल नहीं कहे जा सकते। गुलाबो सपेरा बताती हैं कि उनकी सफलता में उन्हें जमीन से निकालकर बचाने वाली मां- मौसी के साथ पिता और बाद में उनकी कला को मौका देने वाली शिल्पी पांडे- हिम्मतसिंह का बड़ा योगदान है।
गुलाबो सपेरा का कहना है कि जो बेटियों को जन्म के साथ ही मार देते हैं उन्हें समझना चाहिए कि बेटी बोझ नहीं है। बेटी पर परिवार का बोझ होता हैं। मायके से लेकर ससुराल तक वे बोझ उठाती हैं। बेटियों की मदद करें। उनकी काबिलियत पर भरोसा रखें। बेटियों के लिए गुलाबो सपेरा कहती हैं कि वे अपने परिवार का सम्मान करें। आत्मविश्वास रखें। किसी के आगे हाथ न फैलाएं। दूसरा की मदद का जज़्बा रखें।
  • भारत सरकार ने उन्हें 2016 में पद्म श्री के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया।
  • फ्रेंच में थियरी रॉबिन और वेरोनिक गुइलिन द्वारा एक किताब भी लिखी गई है, वह है गुलाबी सपेरा, डैनस्यूस गितेन डु राजस्थान, जिसका अर्थ है गुलाबो सपेरा, राजस्थान की जिप्सी डांसर।
  • पुष्कर मेले में उनके पहले सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद से मान्यता और प्रशंसा की गई, तब वह राज्य के सांस्कृतिक और पर्यटन विभाग का हिस्सा बन गईं।
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