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नाम - डॉ. कृति भारती

जन्म की तारीख - 19 अगस्त

पद - मनोवैज्ञानिक और संस्थापक

संगठन - सारथी ट्रस्ट

स्थान - जोधपुर राजस्थान

जन्म से पहले पिता ने छोड़ा, दस साल की उम्र में जहर भी मिला, लेकिन आज सैंकड़ों बच्चियों को बाल विवाह के दंश से मुक्त करा एक बेहतर जिंदगी देने का काम कर रही सब हेडिंग- जोधपुर की पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती ने सारथी ट्रस्ट स्थापित किया, अब तक चालीस बाल विवाह निरस्त और चौदह सौ से अधिक बाल विवाह रुकवा चुकी, देश का पहला बाल विवाह निरस्त कराने का गौरव भी प्राप्त इंट्रो- बाल विवाह रुकवाने और बाल विवाह निरस्त कराकर बच्चियों को नए सिरे से जिंदगी जीने का मौका देने वाली राजस्थान के जोधपुर की पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती आज हजारों बच्चों और महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर खड़ी है। पीड़ितों के सालों पुराने बाल विवाह को निरस्त कराकर कुप्रथा को जड़ से मिटाने का संकल्प लेकर राजस्थान में उसे कानूनी जामा पहनाने में अग्रणी भूमिका निभाने वाली डॉ. भारती की छोटी सी जिंदगी किसी दुखभरी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बावजूद इसके वह हर कठिनाई, परेशानी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देती है। इसे खुद को मजबूत बनाने के एक अवसर के तौर पर देखती है। आज वह अपने सारथी ट्रस्ट के माध्यम से अब तक रिकॉर्ड चालीस बाल विवाह निरस्त करवाने और चौदह सौ से अधिक बाल विवाह रुकवाने के साथ ही साढे़ छह हजार से अधिक बच्चियों और छह हजार से अधिक महिलाओं को नई जिंदगी की राह पर बढ़ा चुकी है।
कृति को जन्म से पहले पिता ने छोड़ दिया था। डॉक्टर होने के बावजूद कृति के पिता ने मां को छोड़ दिया। इस दौरान कृति गर्भ में थी। इस स्थिति में मां के परिजन नहीं चाहते थे कि कृति का जन्म हो, लेकिन जाको राखे साईंयां मार सके न कोय को चरितार्थ करते हुए हर बार मौत को मात दी। जब कृति गर्भ में थी तो परिजनों ने गर्भपात का मन बनाया, लेकिन समय सीमा बीतने की वजह से ऐसा नहीं करा सके। उसे दुनिया में लाना पड़ा। जन्म के समय भी स्थिति ये थी कि मां या बच्ची दोनों में से कोई एक ही बच सकती थी। बावजूद इसके प्रसव हुआ और कृति दुनिया में आई। दुनिया मे आंख खोलने से पहले उसके जीवन की जद्दोजहद शुरू हो गयी थी, मेडिकल प्रॉब्लम के कारण कृति का जन्म सात माह में प्री-मैच्योर हुआ। वह कहती हैं, जिस उम्र में बच्चों को लाड़ दुलार मिलता है, उस उम्र में उसे दुत्कार, मार मिली। कोई उसकी शक्ल तक देखना या बात करना पसंद नहीं करता था।
कृति को जहर भी नहीं मार पाया। जब वह दस वर्ष की थी तो से जहर देकर मारने की कोशिश हुई। जहर उसके मेरूदंड में ठहर गया। इससे उसकी मृत्यु तो नहीं हुई, लेकिन अचेत और असहाय अवस्था में पहुंच गई। हिल-डूल तक नहीं पा रही थी। तमाम तरह के इलाज कराए, लेकिन असर नहीं हुआ। अंतत: ईश्वर की कृपा से रेकी पद्दति की मदद मिली और नौ माह के बाद वह 12 वर्ष की उम्र में अपने पैरों पर फिर से खड़ी हो पाई। वह कहती हैं, मैं समझती हूं, वहीं से मैनें चलना फिर से चलना शुरू किया।
रेकी पद्दति से इलाज कृति के गुरू ब्रम्हानंद परमहंस ने दिया। ठीक होने के बाद वह उनके ही साथ आश्रम में संन्यासियों की तरह रहने लगी। उनके साथ ही उनके कार्यक्रमों में व्यवस्थाएं संभालना और रेकी का अध्ययन व उपचार सीखना भी शुरू किया, लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और मंजूर था। उसे गुरुदेव का साथ छोड़कर फिर से मां के साथ सामान्य जीवन के अगले पड़ाव के लिए आना पड़ा।
गुरुदेव ब्रम्हानंद परमहंस का आश्रम छोडने के बाद जब फिर से मां के पास सामान्य जीवन में पहुंची तो पढ़ाई फिर से शुरू करने की चुनौती थी। दस साल की उम्र में कक्षा चौथीं में उसने पढ़ाई बंद की थी। अब साढ़े पंद्रह वर्ष की उम्र में कक्षा पांचवीं से पढ़ाई शुरू करना मुश्किल था। ऐसे में दसवीं की परीक्षा देना तय किया, लेकिन इसके लिए अत्यधिक कठिन मेहनत की जरूरत थी जो उसने की। दसवीं की परीक्षा के लिए रोजाना 16 से 18 घंटे पढ़ाई को दिए और वह उत्तीर्ण हुई। कृति के लिए दसवीं की अंकसूची बहुत मायने रखती है। इसमें अंक कम आए, लेकिन असल पढ़ाई यहीं से शुरू हुई। उसके बाद वाली सभी परीक्षाओं में प्रथम श्रेणी अच्छे अंकों से सफल हुई। मनोविज्ञान से स्नातकोत्तर करने के बाद बाल संरक्षण व सुरक्षा विषय पर पीएचडी की है। आज देश विदेश में जानी-मानी पुनर्वास मनोवैज्ञानिक है।
भारती ने अपना उपनाम बदला। भारत की बेटी मानकर भारती उपनाम रखा। भारती का कहना है कि उसने महज 12 साल की उम्र में निराशा में लिया यह सबसे अच्छा निर्णय है। उपनाम बदलने के साथ लोगों द्वारा उसे उनके पिता के उपनाम पर दिए जाने वाले ताने बंद हो गए। अब वह भारती यानी कि भारत की बेटी बनकर खुद की पहचान बना रही हैं।
स्नातक करने के बाद सामाजिक काम करने एनजीओ से जुड़ी। यहां काउंसलिंग करने के दौरान पता चला पीडि़त को सामाजिक न्याय दिलाना जरूरी हैं। ये भी समझ आया कि एनजीओ जमीनी काम नहीं करते हैं और सामाजिक न्याय के लिए जमीनी काम करने की ठानी। 2011 में सारथी ट्रस्ट की स्थापना की। इसके लिए वह दो मोर्चों पर काम करती है। पहला कानूनी प्रक्रिया से बाल विवाह निरस्त करवाना व बाल विवाह रोकथाम करना। इसके साथ ही पीडि़तों की बेहतर जिंदगी के लिए पुनर्वास के साथ उनका कौशल वृद्धि करना। वहीं दूसरी तरफ सारथी ट्रस्ट गांव, आंगनवाडियों में कैंप आयोजित करता है ताकि बाल विवाह के दुष्प्रभाव पर चर्चा कर लोगों को जागरूक किया जा सके। अब तक बाल विवाह रोकथाम व निरस्त के संबंध में 20 हजार से अधिक ग्रामीणों को शपथ दिलवाई है

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सारथी ट्रस्ट की स्थापना के साथ ही कृति ने बाल विवाह निरस्त कराने की अनूठी व साहसिक मुहिम शुरू की। 2012 में देश का पहला बाल विवाह निरस्त कराया। इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। असर ये हुआ कि देश में बाल विवाह निरस्त करने संबंधी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम को कानूनी पहचान मिल गई। देश का पहला बाल विवाह निरस्त को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में जगह दी गई। कृति की बाल विवाह निरस्त कराने के मुहिम को सीबीएसई ने अपने पाठ्यक्रम में भी शामिल किया हैं। वर्ष 2015 में महज तीन दिन में दो जोड़ों के बाल विवाह निरस्त करवाने पर डॉ. कृति का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया, यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित कई रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
बाल विवाह निरस्त करवाने और रोकथाम करने के इस प्रयास में कृति को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी, लेकिन वह इनसे डरी नहीं, डटकर खड़ी रही। उसका कहना हैं कि बचपन में जिस तरह उन्हें कष्ट मिलें, तकलीफें मिली। उससे वह मजबूत हुई। इस मजबूती की ही वजह है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों महिलाओं को सामाजिक न्याय दिलाने की मुहिम चला रही हैं। अब तक दर्जनों बार जानलेवा हमले हो चुके है। वहीं बलात्कार और जान से मारने की धमकियों का सिलसिला कायम है। फिर भी निडर होकर बाल विवाह निरस्त व रोकथाम की अनूठी साहसिक मुहिम पर अग्रसर है।
कृति का कहना है, जब मैं बचपन में कष्ट और परेशानी झेल रही थी तक कोई मुझे बचाने वाला नहीं था, लेकिन अब बच्चियों को विश्वास है। उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने, बाल विवाह से निकालने कृति दीदी हैं। मेरे पास जब भी कोई मामला आता हैं, मैं उस बच्ची की पूरी जिम्मेदारी खुद पर ले लेती हूं। उसे पूरी तरह आश्वस्त करती हूं और इस तरह काम करती हूं कि पीडि़त वह बच्ची नहीं मैं खुद हूं। यही वजह है कि मैं अपना 200 प्रतिशत योगदान देती हूं और अब तक किसी मामले में असफल नहीं रही। सबको पुरानी जिंदगी से निकालकर आगे नए जीवन के रास्ते पर बढ़ाया है। इसी के बूते पर अबतक देश मे 40 बाल विवाह निरस्त करवा दिए है। देश मे केवल कृति ने ही बाल विवाह निरस्त की मुहिम जारी रखी है। इसके अलावा 1400 से अधिक बाल विवाह रुकवाए है।
कृति अपने जीवन का अहम बदलाव और जीवन की शुरुआत 12 वर्ष की उम्र से मानती हैं। इस समय गुरूदेव ब्रम्हानंद परमहंस के सानिध्य में पहुंची और जीवन बदल गया। इसके अलावा कक्षा 11वी-12वीं में कुछ शिक्षक रहे, जिन्होंने उन्हें मंच प्रदान किया। कृति को वाद विवाद प्रतिस्पर्द्धाओं में भेजा। यहां से उन्हें खुलकर बोलने का सबक मिला। उसका कहना हैं कि हर व्यक्ति से वह कुछ न कुछ नया सीखती हैं। हर व्यक्ति उन्हें प्रेरित करता है।
कृति का जोर बाल विवाह रुकवाने के अलावा बाल विवाह को कानूनी निरस्त कराने पर रहता है। उनका कहना हैं कि इस स्थिति में फंसी बच्चियों पर भविष्य में तलाकशुदा होने तमगा न लगा रहे, यही चाहती हैं। कानूनी तौर पर बाल विवाह निरस्त हो जाता है तो भविष्य में जब भी वह विवाह करेगी, उसका पहला ही विवाह कहलाएगा।
बाल विवाह को रोकने पांच स्तरों पर काम किया जाता है। सबसे पहले गांवों में जाकर समझाईश दी जाती है। वहां लोगों के बीच पूरा दिन बीताकर कई तरीकों से बाल विवाह के नुकसान बताकर समझाईश देते हैं, ताकि लोग ऐसा होने ही नहीं दें। इसके अलावा अलग-अलग स्तरों पर प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि इसे रोकने में मदद मिले। लोगों को बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ दिलाई जाती है। इन्हीं में से लोग सूचनाप्रदाता बन जाते हैं और बाल विवाह रोकने में भूमिका निभाते हैं। बाल विवाह हो जाता है तो उसे निरस्त कराने और पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाती हैं। बाल विवाह के प्रति जागरूकता बढ़ाने हर साल शार्ट फिल्में बनाकर डिजिटल माध्यमों से प्रचारित भी किया जाता है। बाल विवाह निरस्त की प्रक्रिया में आने वाली बच्चियों से कृति कोई फीस नहीं लेती है। बिल्कुल निशुल्क समस्त प्रक्रिया अपनाई जाती है। कृति बताती है कि बाल विवाह निरस्त के लिए आने वाली बच्चियों में से ज्यादातर की पढ़ाई बीच मे छुटी हुई होती है, उन बच्चियों को वापस पढ़ाई शुरू करने का वादा ही फीस मानकर लेती है। जिससे अबतक सैकड़ों बच्चियों की पढ़ाई वापस शुरू होने के साथ कई नौकरी भी करने लगी है।
बाल विवाह पीड़ित बच्चियों को बाहर निकालने के दौरान उनके रहने, पढने, खाने और अन्य खर्च कृति भारती खुद के अपने मनोवैज्ञानिक कॉउंसलिंग व अन्य पेशे से ही वहन करती हैं। इसके अलावा उनकी टीम के सदस्य भी मदद करते हैं। बच्चियों के अलग-अलग खर्च के लिए मददगार भी सामने आते हैं, जिससे बच्चियों को उनके बेहतर भविष्य की राह पर ले जाने दिक्कत दूर हो जाती हैं।
कृति के लिए उनकी निराशा, चिंता को दूर करने में नृत्य और गाना बेहद मददगार साबित होता है। कृति का कहना हैं कि नृत्य उनका शौक ही नहीं, खुद को ईश्वर से जोड़कर चिंता, परेशानी, निराशा से दूर होने का जरिया है। वे कोशिश करती हैं कि कम से कम दस मिनिट तो इस शौक को दें। सबकों ऐसा करना चाहिए, साथ ही ईश्वर से प्रार्थना जरूर करना चाहिए। वह तो सब कर सकते हैं।

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डॉ. कृति भारती का कहना है कि ईश्वर ने उन्हें मजबूत करने पैदा होने के पहले से ही मुसीबत में डाला। इसलिए जब भी मुसीबत में हों तो ईश्वर का साथ मत छोडिए। इसके साथ ही काम को पूरा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति रखीए। जो भी काम आप हाथ में लें, उसे दोगुना मेहनत और लगन से पूरा कीजिए। हो सकता है एक बार में वह नहीं हो, तो निराश न हों। जब तक काम पूरी तरह से न बने, करते रहिए, वह अवश्य होगा। यही एक मंत्र हैं।
डाॅ.कृति भारती को बाल कल्याण एवं महिला पुनरूत्थान व पुनर्वास के क्षेत्र में साहसिक नवाचारों के लिए राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानों से नवाजा जा चुका है। यूएसए की टैफैड मैगज़ीन ने विश्व के टॉप 10 एक्टिविस्ट की सूची में शामिल किया। इसके अलावा डॉ. कृति को बीबीसी हिंदी की 100 प्रभावशाली महिलायों की सूची में शामिल किया जा चुका है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के पिक्सेल प्रोजेक्ट की ओर से विश्वस्तर पर महिला रोल माॅडल में सातवें स्थान पर शुमार किया गया। सारथी ट्रस्ट को विश्व रैकिंग में दसवें स्थान पर रखा गया। इसके अलावा थाॅमसन राॅयटर फाउंडेषन लंदन की ओर से लंदन में आयोजित ट्रस्ट वुमन कांफ्रेंस में विशेष फैलोशिप सम्मान,कोलम्बो में सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय संगठन गल्र्स नाॅट ब्राइड्स की ओर से विष्व स्तर पर चेंज मेकर की उपाधि, चीफ जस्टिस आॅफ राजस्थान की ओर से सम्मान, मारवाड़ राजघराने की ओर से मारवाड़ रत्न राष्ट्रीय (राव जोधा स्मृति) सम्मान 2015, मेवाड़ राजघराने की ओर से मेवाड़ रत्न (महाराणा मेवाड़) सम्मान 2015, इंटरनेषनल यूथ कमेटी की ओर से नेषनल यूथ आइकाॅन अवार्ड 2018, यूआरएफ ग्लोबल अवाॅर्ड 2015, निदेषालय महिला अधिकारिता की ओर से गरिमा बालिका संरक्षण एवं सम्मान 2016, वुमन आॅफ दी फ्यूचर अवार्ड 2015, जिला प्रषासन जोधपुर की ओर से जिला स्तरीय सम्मान 2014,एनडीटीवी के विशेष कैंपेन अवर गल्र्स अवर प्राइड में अभिनेत्री प्रियंका चौपडा द्वारा सम्मानित, कलर्स चैनल के बालिका वधु कार्यक्रम की टीम की ओर से सम्मानित व अन्य कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
  • उनका काम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया में भारत में पहली बार बाल विवाह की घोषणा में शामिल है। और CBSE बोर्ड के 11'th और 12'th मानक के पाठ्यक्रम में भी शामिल है।
  • डॉ. कृति भारती बीबीसी हिंदी की 100 प्रेरणादायक महिलाओं की सूची में भी शामिल हैं।
  • डॉ। कृति भारती को लंदन थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ट्रस्ट महिला सम्मेलन में विशेष फेलोशिप सम्मान मिला।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठन गर्ल्स नॉट ब्राइड ने उन्हें “चेंज मेकर” टाइटल से सम्मानित किया है।
  • राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सम्मानित उन्हें मारवाड़ और मेवाड़ के रॉयल हाउस से राष्ट्रीय मारवाड़ रतन, मेवाड़ रतन से सम्मानित किया गया है
  • अंतर्राष्ट्रीय युवा समिति से राष्ट्रीय युवा आइकन पुरस्कार 2018
  • यूआरएफ ग्लोबल अवार्ड 2015, गरिमा और बालिका सरक्षण और सम्मान महिला सशक्तिकरण निदेशालय द्वारा |
  • प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय सम्मान- "वुमन ऑफ द ईयर फ्यूचर अवार्ड" |
  • उन्हें अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा द्वारा NDTV के विशेष अभियान हमारी लड़कियां हमारा गौरव ’से भी सम्मानित किया गया |
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