Successful Indian - successfullindian

नाम - मुकेश थापा

पद - सिंगल हेयर आर्टिस्ट, अंतर्राष्ट्रीय कलाकार

जन्म की तारीख - 29 मार्च

स्थान - धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश

अपने शौक को जुनून के स्तर पर ले जाकर कड़ी मेहनत से नए अंदाज में केनवास पर उतार दिया जाए तो शायद उसे मुकेश थापा कहते हैं। जी, विश्व में सिंगल हेयर आर्टिस्ट के नाम से प्रसिद्ध मुकेश थापा ने दाढ़ी के एक बाल से केनवास पर अद्भूत कलाकृतियां उकेरी। कड़ी मेहनत- लगन से आज वे विश्वस्तरीय आर्टिस्ट है। मुकेश थापा की सफलता की कहानी हर किसी को कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करती है।
हिमाचल के धर्मशाला में 29 मार्च 1979 को जन्मे और पले बढ़े थापा को अपने पेंटिंग के शौक का पता दस साल की उम्र में ही लग गया था। कक्षा चार में उन्होंने पेंटिंग शुरू की। शुरुआत में कागज, फिर कबाड़ के कार्डबोर्ड और बाद में केनवास। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के सिर्फ लगन, लगन और लगन। यही एक सूत्रवाक्य थापा ने जीवन में थामा और अद्भूत, आश्चर्यचकित विश्वस्तरीय पेंटिंग्स बना दी। वे देश-विदेश की विभिन्न पेंटिंग स्पद्र्धाओं में प्रथम स्थान के अनगिनत पुरूस्कार उनके नाम दर्ज है। लिम्का बुक ऑफर दि वल्र्ड रिकॉर्ड समेत विश्व की दस रिकॉर्ड बुक्स में वे अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। थापा की उम्र अभी 40 वर्ष के करीब है और इसमें से 30 साल सिर्फ अपनी कला को विकसित करने, दुनिया के सामने लाने में लगा दिया।
थापा ने दस साल की उम्र में जब पेंटिंग की और स्कूल स्तर पर उसे स्पद्र्धाओं में प्रदर्शित किया तो उनके दोस्तों, शिक्षकों व परिचितों को वे अच्छी लगी। इससे उन्हें प्रोत्साहन मिला। कुछ और पेंटिंग्स बनाई और स्कूल व स्थानीय स्पद्र्धाओं में प्रदर्शित की। अपने शहर से जिला, यहां से स्टेट और फिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पेंटिंग स्पद्र्धाओं में इन्हें भेजा। कुछ अलग करने का विचार आया तो अपनी दाढ़ी के एक बाल का ब्रश बनाया और पेंटिंग शुरू की। आज वे विश्व में सिंगल हेयर आर्टिस्ट के नाम से विख्यात है। उनका कहना है, कुछ अलग करेंगे तो दुनिया ध्यान देगी और इसी वजह से उन्होंने सिंगल हेयर से पेंटिंग शुरू की। अपने शौक को प्रोफेशन बनाने की राह तक आई तमाम बाधाओं को पार करने में वे अपनी मां की बड़ी भूमिका बताते है। थापा का कहना है कि पेंटिंग्स को लेकर जितनी भी जरूरतें थी, उनकी मां ने बेझिझक पूरी की। कभी भी उन्हें इसे लेकर हतोत्साहित नहीं किया।
थापा को 1992 में एक पेंटिंग स्पद्र्धा में पहला पुरूस्कार मिला तो उन्होंने इसे ही अपना प्रोफेशन बनाने की ठान ली। थापा का कहना है कि बहुत कम होते हैं, जो शौक को प्रोफेशन बनाते हैं और मेरे लिए इसे प्रोफेशन चुनना बेहद कठिन था। 24 घंटे में से 16 घंटे पेंटिंग्स को देने के बाद अन्य किसी काम के लिए कोई समय नहीं रहता। मैं जब तक संतुष्ट नहीं होता, तब तक प्रयास करता हूं। पहली बार ब्रश पेंटिंग दाढ़ी का एक बाल लेकर की। इस ब्रश से 2012 में सेल्फ पोर्ट्रेट यानि खुद का चित्र बनाया। इसमें समय तो काफी लगा, लेकिन मेहनत और लगन रंग लाई, ये अद्भूत बना। इसे दुनिया में सराहा गया। वे अब तक 600 से अधिक पेंटिंग बना चुके हैं।

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थापा ने अपनी पेंटिंग्स को देश- विदेश में घुम-घुमकर विभिन्न चित्र प्रदर्शिनीयों में ले जाकर लोगों को बताया। अमेरिका में पेंटिंग्स स्पद्र्धाओं में भाग लिया और प्रथम स्थान प्राप्त किया। भारत का नाम विश्व में रोशन किया। 2015 में थापा को यूएस में बोल्ड ब्रथ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यहां पेटिंग स्पद्र्धा में विश्वभर से 1400 पेंटिग्स आई और यहां प्रथम पुरूस्कार के लिए थापा की पेंटिंग चुनी गई।थापा ने अपनी पेंटिंग्स को देश- विदेश में घुम-घुमकर विभिन्न चित्र प्रदर्शिनीयों में ले जाकर लोगों को बताया। अमेरिका में पेंटिंग्स स्पद्र्धाओं में भाग लिया और प्रथम स्थान प्राप्त किया। भारत का नाम विश्व में रोशन किया। 2015 में थापा को यूएस में बोल्ड ब्रथ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यहां पेटिंग स्पद्र्धा में विश्वभर से 1400 पेंटिग्स आई और यहां प्रथम पुरूस्कार के लिए थापा की पेंटिंग चुनी गई।
अब थापा ने देशभर की पेंटिंग्स प्रदर्शनियों में अपनी पेंटिंग ले जाने की बजाय खुद की आर्ट गैलेरी बना ली है। ये हिमाचल की धर्मशाला में ही है। जिन पेंटिंग्स की बदौलत उन्होंने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरूस्कार जीते, वे इस आर्ट गैलेरी में रखी गई। थापा पेंटिंग की किसी एक विधा पर निर्भर नहीं है। वे कहते हैं कि सभी विधाओं में उन्होंने चित्रकारी की है। वे सब इस आर्ट गैलेरी में एक ही स्थान पर देखी जा सकती है। आमलोगों के लिए ये गैलेरी खुली है।
अब वे सरकार से उनकी पेंटिंग्स को बचाने की उम्मीद करते हैं। उनका कहना है कि जिन पेंटिंग्स से उन्होंने विश्वस्तर पर देश का नाम रोशन किया। जिनपर पुरूस्कार मिले, यदि शासन की ओर से कुछ आर्थिक प्रयास नहीं किए गए तो वे पेंटिंग्स बेचना होगी। थापा अपनी पेटिंग्स पर कीमत का टैग नहीं लगाते। उनका कहना है कि कला ईश्वर और उसकी कीमत तय नहीं करते।
थापा कहते हैं किसी भी काम में सफल होने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति बहुत जरूरी है। तन, मन और धन ये तीनों ही व्यक्ति को सफल करते हैं। उनके अनुसार कोई भी काम एकाग्रचित्त से किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। आप एक साथ कई काम करने का सोचेंगे तो किसी के साथ भी न्याय नहीं कर पाएंगे।
थापा के लिए सफलता का अर्थ “अपने काम से संतुष्टि का अहसास है जरूरीहै”। यदि कोई अपने काम से संतुष्ट है तो समझो वह सफल है। सफलता के लिए वे युवाओं से कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास करने का कहते हैं। बिना मेहनत और प्रयास सफलता मुश्किल है।
  • लिम्का बुक रिकॉर्ड्स, 2012
  • वर्ल्ड रिकॉर्ड एसोसिएशन चाइना 2013
  • एवरेस्ट विश्व रिकॉर्ड नेपाल 2013
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2013
  • वर्ष 2018: 105 वां वार्षिक, अमेरिका कला प्रदर्शनी , संयुक्त राज्य अमेरिका, के सहयोगी कलाकार।
  • वर्ष 2018: 13 वां वार्षिक, यथार्थवाद कला प्रदर्शनी, संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय गिल्ड।
  • वर्ष 2016: अमेरिकी कला पुरस्कार - श्रेणी 24 अभिनव -1 प्रथम स्थान यूएसए।
  • वर्ष 2016: अमेरिकी कला पुरस्कार - श्रेणी 15 फैशन -2 वां स्थान यूएसए।
  • वर्ष 2016: अमेरिकी कला पुरस्कार - श्रेणी 24 अभिनव - तीसरा स्थान। अमेरीका |
  • वर्ष 2015: प्रथम स्थान पुरस्कार, द बोल्डब्रश अवार्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, यूएसए।
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