Successful Indian - successfullindian

नाम - डॉ मोतीउर रहमान खान

जन्म - 10 जनवरी 1974

जन्म स्थान - सिवान ( बसंतपुर )

व्यवसाय - अध्यापक

शिक्षा और ज्ञान का संबंध जितना गहरा होता है ,उतना ही गहरा संबंध गुरु और शिष्य का होता है । इसी गुणों के ताल मेल को बख़ूबी से समझते है डॉ मोतीउर रहमान खान।
डॉ मोतीउर रहमान खान ने शिक्षा और ज्ञान के बलबूते पर हिंदुस्तान के 25000 बच्चों को ऑफिसर बनाया है। जिसमें से 8 (आई.एस.ऑफिसर), 8(आईपीएस ऑफिसर), 4500 (सब इंस्पेक्टर), 300 से ज्यादा (एस पी सी) , 167 (डी.वाय.एस.टी) 73 (स्टैंड कमांडर) और भी कई ऑफिसर है। एक पुलिस इंस्पेक्टर का बेटा होने के नाते, वह एक आईपीएस अधिकारी बनना चाहते थे। वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उपस्थित हुए और कुछ परीक्षाओं में वे सफल भी रहे, इसलिए उन्होंने अपने छात्रों को (यूपी एससी),आईएएस और बीपी (एससी) जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग देना शुरू किया। 1994 से उन्होंने पढ़ाना शुरू किया था,11 रुपय फीस से शुरुआत की और आज वे 101 रुपये सालाना लेते है।.
रहमान खान का जन्म 10 जनवरी 1974 सिवान ( बसंतपुर )में हुआ। पीता रिटायर्ड सबइंस्पेक्टर है। पढ़ाई में रुचि रखने वाले रहमान खान ने 2 बार (पी.जी ) किया, साथ ही ऋग्वेद और ग्रामीण क्षेत्र के बारे में अनुसंधान किया है। वह 3 भाई और 2 बहन है । घर में सबसे छोटे और सबसे सफल साबित हुए है ।
जब इंसान को बनाया गया तब मज़ीद और मंदिर के बारे में मनुष्य नहीं जानते थे। इस चंगुल में उलझे इंसान आज रोज़ एक दूसरे को मरने-मारने पर तुले है, वह यह भूल चुके है कि हिंदू - मुसलमान से पहले वह सब एक मनुष्य है।
वे आगे बताते है कि उन्हें कॉलेज में एक लड़की से प्रेम हुआ, वह जानते थे कि वह लड़की हिंदु है परंतु वह पंडित है, इस बात से वह अनभिज्ञ थे। धर्म - मज़हब के जाल से दूर, उन्होंने भाग जाने का फैसला किया और अपनी ज़िंदगी की नए सिरे से शुरुआत की। यह निर्णय उनके लिए बहुत कठिन दौर लेकर आया, उनपर लगातार हमले होने लगे, तीन बार उन्हें गोलियों से मारने कि कोशिश की गई। प्यार की ताकत और उनकी हिम्मत ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी और जंग का सामना करते रहे । 2004 से 2006 के बीच वित्तीय समस्याओं के कारण वह आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत परेशान रहे, आगे वे बताते है कि मैडम का खर्चा और खुद का खर्चा निकाल पाए इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ कड़ी मेहनत करना शुरू की ,दैनिक जागण में रात के 12 बजे से शाम 5 बजे तक नौकरी करते थे,और शनिवार और रविवार को कोचिंग के पोस्टर लोगो तक पहुंचाने का कार्य करते थे। कठिन परिश्रम के साथ आगे बढ़ते रहे।
रेहमान ने पत्नी को धर्म बदलने के लिए नहीं कहा एवं 2007 में वह शादी के अटूट रिश्ते में बंधे उन्होंने अमिता कुमारी से पटना के बिरलामन्दिर में हिंदु रितिरीवाज से विवाह किया।अब उनके परिवार में एक बेटी (अदम्य अदिति) और एक बेटा (अभिज्ञान अर्जित) है। वे आगे बताते है की "मैं और मेरी पत्नी इस बात पर बहुत स्पष्ट थे, कि हममें से कोई भी अपना धर्म बदलने वाला नहीं है और यह निर्णय समाज को अस्वीकार था। जिसके कारण हमारा सभी ने बहिष्कार किया और मुझे कहीं भी नौकरी नहीं मिली"|
रेहमान पर 13 फतवा लगे, पर उन्होंने पूरा करने से इंकार किया, इसलिए उन्हें इस्लामिक धर्म से अलग कर दिया गया। इतनी कठिन परिस्थितियों से गुज़रने के बाद, उन्होंने यह निर्णय लिया कि वह गरीब अथवा ज़रूरतमंद लोगों कि सहायता करेंगे और तभी से उन्होंने 11 रुपये में पढ़ाना शुरू किया, रहमान ने अपने छोटे किराए के कमरे में अपनी कक्षाएँ शुरू कीं जहाँ वह छात्रों को फर्श पर बैठ कर पढ़ाते थे। 2007 तक, रहमान को गुरु रहमान के रूप में जाना जाने लगा। उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर अपनी अकादमी का नाम अदम्य अदिति गुरुकुल रखा।
जीवन मे इतनी सारी कठिनाइयों का सामना करते हुए उन्होंने एक ओर परेशानी का सामना किया, वे आगे बताते है, कि कुछ वक़्त पहले जब उनकी माँ का देहांत हुआ था। यह समय था उनके अधिकार का, की वे अपनी माँ को आखिरी विदा दे ,परन्तु मुस्लिम कोंब के कुछ लोगो ने आपत्ति जताई और उन्हें कब्र पे मिट्टी की दुआ करने से रोका गया। “अच्छे का फल हमेशा अच्छा होता है” इसलिए उनके द्वारा पढ़ाये गए छात्र जो पुलिस कर्मचारी है ,उनकी मदद से रेहमान ने अपनी माँ को मिट्टी दी।
डॉ मोतीउर रहमान खान ने अपने बच्चों के साथ मिलकर पटना के चार घाट कि सेवा की है काली घाट ,बंसी घाट, कदम घाट, गांधी घाट’ उन्होंने चारो घाट की सफ़ाई का ज़िम्मा लिया है। वे गरीब बच्चों को 101 रूपये ट्यूशन देने के साथ समाजिक सेवा भी करते है। उन्होंने ने कोरोना पंडेमिक में ग़रीबों को भोजन दान किया है| समाज सेवा के साथ रेहमान ने 100 कन्यादान भी किए है। इसके अलावा 45 बार उन्होंने रक्त दान भी किया, एवं "दधीचि देह दान समिति" में अपना शरीर दान करने का फैसला किया है। श्री रहमान जी के जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म भी बनायीं जा रही है जो की साल 2021 के अंत तक आ सकती है | इसके को-डायरेक्टर श्री दीपक भागवत जी एवं स्क्रिप्ट राइटर श्री माधव सक्सेना जी है | जैसा की रहमान जी हमेशा कहते है मज़हब, धर्म एवं शिक्षा से ऊपर भी कोई चीज़ है उसका नाम है "मानवता"| तो मानवता को कैसे हम अपने जीवन में ऊपर रख अपने जीवन का अहम हिस्सा बना सकते है, यह दिखाने का प्रयास इस बायोपिक मे किया है | क्योंकि रहमान जी हमेशा कहते है हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई बनकर तो सब लोग जी रहे है लेकिन इंसान बनकर जीना बहुत कठिन है, और इन सारे धर्म से भी बड़कर कोई चीज़ है और वो है मानवता | सपनों की चाह बात-चीत के दौरान रेहमान ने अपने लक्ष्य की चर्चा करते हुए बताया कि “मैं चाहत हूं कि गरीब बच्चों के लिए में एक अदम्य अदिति विद्यालय का निर्माण करूँ, जिसमें उन बच्चों का दाख़िला हो जिनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है, और जिसके कारण उनके सपने अधूरे है”। यह विद्यालय उनको काबिल बनाने में सक्षम होगा। वास्तविकता के एक बिंदु को स्पर्श करते यह विद्वान वास्तविकता का सही मतलब सांझा करते हुए मोतीउर रहमान खान कहते है "इंसान की मदद करना और किए हुए वादों को सच्चाई के साथ निभाना ही वास्तविकता की पहचान है” ।उन्होंने न केवल बच्चों को ज्ञान दिया अथवा आज भी वह लगातार अपने छात्रों को एक अभिभावक की तरह प्रेरित करते रहते हैं, जो छात्र आर्थिक रूप से गरीब है रेहमान उनके लिए सदैव उपस्थिति रहते है। मोतीउर रहमान खान आज भी बच्चों को पढ़ाने में मेहनत करते रहे है, आज वे मात्र 101 रूपये सालाना में बच्चों को 14 -15 घंटे पढ़ाते है और आज भी आर्थिक स्थिति के साथ समाज से लड़ रहे है| उनका परिश्रम निरंतर चल रहा है परंतु, कभी न हार मनने वाले रेहमान बच्चों को ख़ुशी-खशी पढ़ा रहे है। वे आगे कहते है की उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे अकादमी चलाने में उनकी आर्थिक रूप से मदद करते है। लेकिन इसके उपरांत, अभी भी उन्हें समाज से वह स्थान व प्यार नहीं मिला है, जिसके वे हक़दार है| मेरा धर्म कुछ नहीं मैं मात्र एक इंसान हूं बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले रेहमान कहते है (हिंदी, मुस्लिम, सिख, ईसाई) कुछ नहीं हैं। अगर आप एक इंसान की मदद करते है, तो समझिए कि आपने अपने भगवान की मदद की है। इंसान से बड़ा इस पृथ्वी पर कोई नहीं है। "रोज रोज गिरकर भी रेहमान आज उचायो पर खड़े है। मुस्कुरा कर कहते है , ए मुश्किलों! देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूं।"
सकारात्मक विचारों से संपन्न रेहमान ग़रीबों की सहायता करते आ रहे है, और उनका यह मानना है कि "हर व्यक्ति को अपनी आय से एक गरीब को पढ़ाना चाहिए" एसी सोच समाज में हर आदमी की होनी चाहिए। भारत हो या कोई और अन्य देश रेहमान जैसे व्यक्ति का होना हमारे देश में बहुत महत्वपूर्ण साबित होता है। इनकी सकारात्मक ऊर्जा से लोगो के मन में एकजुट रहने का संकल्प और गरीबी को असहाय होने से बचाता है। ये केवल शिक्षा के गुरु नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता ने मानवता की मिसाल कायम की है। शिक्षा का उद्देश्य एक सामान्य जीवन को विकसित करना है, “स्वामी विवेकानंद जी - कहते है शिक्षा से ज्यादा मूल्यवान इस संसार में कुछ भी नही है”| इसलिए हमारा मुख्य उद्देश्य शिक्षा को अर्जित कर, उसे विस्तृत करना होना चाहिए| जैसे डॉ. मोतीउर रहमान खान आज शिक्षा के माध्यम से बच्चों को प्रेरणा प्रदान कर रहे है।

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  • संसद भवन में नीलकंठ सम्मान 2019
  • रसीदन बीबी शिक्षा सम्मान ज़ी मीडिया हेद के द्वारा 2018
  • ज़ी मीडिया अवार्ड 2019
  • प्रभात खबर के चीफ एडिटर के द्वारा बेस्ट गुरु सम्मान 2018
  • विराट हिंदुस्तान संगम बिहार शाखा द्वारा 2017
  • बिहार शिक्षा सम्मान बिहार सरकार के द्वारा 2015
  • ब्लड डोनेशन के लिए सिक्किम के राज्यपाल के द्वारा 2019
  • देहदान के लिए मोहनभागवत के द्वारा 2013
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