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नाम - रोशन नागर

पद - सहायक प्रबन्दक ( BOB ) ग्रामीण

जन्म तिथि - 15 अगस्त 1992

स्थान - जयपुर

मजबूत हाथ-पांव और शरीर होने के बावजूद जो लोग निराशा और हताशा के गर्त में हैं, उन्हें एक बार जयपुर के रोशन नागर के जीवन की कहानी जरूर पढ़ लेना चाहिए। महज आठ वर्ष की उम्र में अपने दोनों हाथ और एक पांव गंवाने के बावजूद सिर्फ मजबूत इच्छा शक्ति और हिम्मत के सहारे ही कैसे जिंदगी की लड़ाई लड़ी जाए, वे इसका जीवंत उदाहरण है। शारीरिक कमियों के बावजूद दूसरों के लिए प्रेरणा बनने तक का सफर किसी के भी जीवन का उत्साह और उर्जा से भर सकता है। जिस अपंगता को लोग अपनी कमजोरी मानकर बैठ जाते हैं, नागर ने उसे ही आज अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। मोटिवेशनल स्पीच व कविता पाठ के 100 से अधिक इवेंट कर चुके हैं। राजस्थान सरकार के साथ ही कई सामाजिक संगठनों ने उनके साहस का सम्मान किया और एक संस्था ने तो उन्हें अपना ब्रांड एंबेसेडर तक बना लिया। शारीरिक अपंगता के साथ जब वे लोगों को मोटिवेशनल स्पीच देते हैं या कविता का पाठ करते हैं तो लोग निराशा से निकल खुद को हर काम करने में सक्षम महसूस करने लगते हैं।
रोशन नागर की जिंदगी तकलीफों-दिक्कतों, संघर्ष के बीच मजबूत इच्छा शक्ति से सफलता की ओर बढऩे का एक मॉडल है। जनवरी 2002 में महज आठ वर्ष की उम्र में खेलते हुए वे बिजली की हाईटेंशन लाइन के तार की चपेट में आ गए। शरीर के अंदर का खून तक जल गया। शरीर में इंफेक् शन फैल गया। डॉक्टर्स ने बच्चे की जिंदगी बचाने का अंतिम इलाज दोनों हाथ व एक पांव काटना बताया। बच्चा बचा रहेगा, इस उम्मीद से परिजनों ने सर्जरी की अनुमति दी। एक हंसती खेलती जिंदगी गहरे जख्म, दर्द और बिस्तर पर सिमटकर रह गई। 2002-2003 रोशन के लिए शारीरिक कष्ट और तकलीफों से भरा रहा। वे पूरी तरह बिस्तर पर रहे। इलाज से कुछ राहत मिली और धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर आने लगी। नागर का एक छोटा भाई है जो हमेशा मदद के लिए आगे रहता है। पिता और दादी का साथ हमेशा मिला।
जिंदगी की नई शुरूआत आर्टिफिशियल पैरों की तलाश में भटकते समय ही हुई। एक जगह पर वे आर्टिफिशियल पैरों के लिए गए थे। वहां लोगों ने सहानुभूतिवश एक व्यक्ति ने कटे हुए हाथों पर पेन बाधकर लिखने की प्रैक्टिस करने की सलाह परिजनों को दी। नागर के दादाजी और अन्य परिजनों को ये ठीक लगा। ऑपरेशन के बाद हाथ का चार इंच भाग बचा था। इसपर पेन बांधकर लिखने की प्रैक्टिस शुरू हुई। शुरुआत में इससे काफी दर्द हुआ, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सुधरी। हाथ और पांच की अपंगता के साथ ही वर्ष 2004-05 में रोशन ने फिर स्कूल की राह पकड़ी। कक्षा 4 में प्रवेश लिया। पढऩे की लगन ऐसी रही कि तीन बोर्ड परीक्षाएं सामान्य छात्रों की तरह तय समय में पूरी की। प्रथम श्रेणी परिणाम रहा। रोशन नागर ने 2014 में बीकॉम में स्नातक की परीक्षा भी पास की।
बी.कॉम करने के बाद नागर ने सरकारी नौकरी करने एसएससी की परीक्षा पास करने का मन बनाया। करीब डेढ़ साल कोचिंग करने के बाद उन्हेंपता चला, इसके लिए कम से कम एक हाथ होना जरूरी है। उनके तो दोनों हाथ नहीं है। कोचिंग छोड़ दी। मित्रों की सलाह पर उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने की योजना बनाई। एक साथी के साथ मिलकर हार्डवेयर कंम्यूटर ट्रेनिंग का सेंटर खोला। करीब चार लाख की बड़ी रकम इसके लिए खर्च की। पहले ये सरकारी ऑडिट में फैल हुआ। सुधार के बाद फिर ऑडिट कराया, जिसमें से पास हुआ, लेकिन योजना में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा होने के बाद सरकार ने इस तरह के सेंटर बंद करा दिए। बड़ी राशि और समय को खर्च करने के बावजूद परिस्थितियों की वजह से आगामी जिंदगी के लिए नागर की सारी उम्मीदें टूट गई। सेंटर बंद करना पड़ा। फिर एक बार घर की चारदिवारी में सिमटने को मजबूर होना पड़ा। लेकिन इच्छाशक्ति कमजोर नहीं हुई।
नागर का सेंटर बंद हुआ और वे घर को फिर लौट आए। उनके रिश्तेदारों-दोस्तों ने उनसे दूरियां बना ली। घर पर बैठे हुए रोशन नागर ने कविताएं लिखना शुरू की। जयपुर में एक रेडियो जॉकी की सलाह पर उन्होंने ओपन माइक कार्यक्रम में अपने जीवन के संघर्ष और अब तक की कहानी को लोगों के सामने प्रस्तुत किया। संघर्ष और सफलता की इस कहानी को काफी सराहा गया। कई लोगों के सामने शुरूआत में नागर ने डरे और सहमें हुए अपने जीवन के संघर्ष और इससे उबरने की बात सुनाई। ओपन माइक प्रोग्राम, मोटिवेशनल स्पीकिंग इवेंट का सिलसिला शुरू हुआ तो आत्मविश्वास भी बढ़ा। नागर ने अपनी कविताएं भी सुनाना शुरू की। स्थानीय स्तर पर आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने का मौका मिला। स्थिति ये रही कि धीरे-धीरे उनके प्रशंसक बढ़े और उन्हें आयोजक खुद आगे आकर अपने कार्यक्रमों में स्पीच देने, कविताएं सुनाने के लिए आमंत्रित करने लगे। हाल में नागर ने अपनी लिखी 50 कविताओं की एक पुस्तक ख्याल नाम से प्रकाशित कराई है ताकि लोग उनके मन की भावनाओं-बातों को कविताओं में भी पढ़ सके। नागर का एक यू ट्यूब चैनल भी है। रोशन नागर के नाम से बने इस चैनल पर आपको नागर की मोटिवेशल स्पीच के साथ उनके जीवन के संघर्ष और कविताएं भी मिल जाएगी।
रोशन नागर की कविता की पुस्तक अभी फरवरी 2020 में प्रकाशित हुई है। नागर का कहना है कि जीवन में उनका सबसे बड़ा आदर्श-पथ प्रदर्शक समय ही रहा। इसके बाद वे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानते हैं। नागर का कहना है कि मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर वे लोगों को खुद का उदाहरण देते हैं। बताते हैं कि जिंदगी में कितनी ही बड़ी समस्या आए, घबराएं नहीं। जब वे बिना हाथ-पांव के सबकुछ कर सकते हैं तो जिनके हाथ पांव सही सलामत है, वे क्या नहीं कर सकते। वे लोगों को एक ही मंत्र देते हैं, बुरा समय सबका आता है, इसमें खुद को संभालों। ये बीत जाता है और जीवन फिर से आगे बढऩे को तैयार रहता है। नागर की नजर में सफलता का एक अलग ही अर्थ है। वे कहते हैं, जब आप कोई काम कर रहे हैं और उसमें आपको कोई परेशानी न लगे तो समझो आप सफल है। वे कहते हैं, समस्याओं से घबराने की बजाय काम करने के तरीके बदल लें और आगे बढ़े। खुद को ही पॉजीटिविटी दें, खुश रखे। जितना आप खुद को जानते हैं, दूसरा कोई नहीं। इसी सोच के साथ आगे बढ़े सफलता जरूर मिलेगी। रोशन इस समय गुलशन चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्रांड एंबेसेडर है। इसी ट्रस्ट की मदद से उन्हें 13 लाख रुपए की लागत के इलेक्ट्रिक हाथ मिले। राजस्थान सरकार ने उन्हें स्टार स्पीकर का अवार्ड दिया। प्रेरणा अवार्ड के साथ भारतीय प्रतिभा गौरव अवार्ड भी मिला है। दस से अधिक संस्थाओं ने इन्हें विभिन्न अवार्ड से सम्मानित किया। रोशन की एक निजी संस्था है जो दिव्यांग बच्चों को निशुल्क कंप्युटर कोर्स कराती है।
  • दोनों हाथ और एक पैर ना होने के बाद भी आठवीं, दसवीं, बारहवीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीण की। राजस्थान विश्वविद्यालय से वाणिज्य वर्ग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
  • जीवन में आई कई चुनौतियों के बाद भी मैने मेरा जीवन सकारात्मक ढंक से जिया और समाज के लोगों के लिए प्रेरणा साबित हुआ। इसके लिए राजस्थान सरकार ने मुझे 25 फरवरी को राज्य स्तरीय अवार्ड, संस्था खुशी लाइफ लर्निंग द्वारा मुझे स्टार स्पीकर अवार्ड, जेआईपीएल द्वारा प्रेरणा गौरव अवार्ड से नवाजा।
  • जीवन में कभी हार न मानने वाले मेरे इस हौंसले को देखते हुए डॉ. राजेंद्र कुमार सेन जी द्वारा मुझे गुलशन चैरिटेबल ट्रस्ट को ब्रांड एंबेसेडर बनाया।
  • साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए अब तक मैने दिव्यांग होते हुए 25 से ज्यादा काव्य पाठ के कार्यक्रम किए हैं। जिनमें से अब तक मुझे दस प्रोत्साहन अवार्ड मिले हैं। जिनमें मुख्य रूप से गुजरात में राष्ट्रीय एकता समिति एवं राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में मिला। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में अवार्ड जयपुर में जेआईपीएल द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में शब्द सरिता का अवार्ड है।
  • दिव्यांग होते हुए साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में हमारे द्वारा किए गए कार्यों के लिए केवल्य सेवा संस्था जोधपुर से दिव्यांग गौरव अवार्ड से नवाजा गया है।
  • उत्कृष्ट कार्यों के लिए रैगर समाज पंयायत द्वारा मुझे उत्कृष्ठ प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
  • जीवन संदेश ट्रस्ट द्वारा प्रेरणा स्त्रोत एवं साहित्य के क्षेत्र में मुझे मेरठ दिव्यांग रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • कोटा राजस्थान में रिम झिम ब्यूटी पार्लर द्वारा मुझे कोटा प्राइड अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • शक्ति फिल्म प्रोडक्शन द्वारा साहित्य के क्षेत्र में मुझे जयपुर रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • साझा काव्य संग्रह द्वारा इस साल में प्रकाशित पुस्तक काव्य संगम के संस्करण में मेरे द्वारा लिखी गई पांच कविताओं को स्थान प्राप्त हुआ। इसी वर्ष मेरी कई रचनाएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। यह मेरी प्रथम साझा काव्य पुस्तक है।
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