Chania

नाम - विकास वैभव

पद - इंस्पेक्टर जनरल (आईपीएस)

जन्म तिथि - 21st नवंबर 1979

स्थान - बेगूसराय, बिहार

इतिहास, यूं तो हमें अपनी सभ्यता, संस्कृति से जोड़े रखने का काम करता है, लेकिन ये आई.आई.टी और फिर आई.पी.एस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता दिलाने में भी भूमिका निभा दें तो बात ही क्या? इतना ही नहीं, समाज में व्यक्ति को एक नायक के तौर पर स्थापित कर दें तो सोने पर सुहागा ही है। बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी विकास वैभव की कहानी कुछ ऐसी ही है। देश के इतिहास पर हमेशा गर्व करने वाले विकास वैभव का मन जो वर्तमान परिस्थितियों को देखकर दुखी हुआ तो इतिहास और वर्तमान के द्वंद शुरू हुआ। इतिहास से कैसे वर्तमान सुधारा जाए, ये सवाल उठा और इसका जवाब एक सफल पुलिस अधिकारी, इतिहासकार, समाजसेवक, प्रेरक वक्ता के रूप में हमारे सामने आया। आज विकास वैभव कई लोगों की जिंदगियों के साथ कई क्षेत्रों का कायाकल्प कर चुके हैं। अब इतिहास का स्वर्णिम युग को सबके सामने लाकर भारत को विश्व का सिरमौर बनाने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं।
विकास वैभव के पिता इंडियन ऑयल कंपनी में अधिकारी थे, इसलिए पढ़ाई के दौरान देश के अलग-अलग शहरों में रहने और उन्हें समझने का मौका मिला। गुवाहाटी से लेकर भोपाल, दिल्ली जैसे शहरों में पिता के स्थानांतरण के साथ वे भी भ्रमण करते रहे। मूल रूप से बेगूसराय से जुड़े विकास ने 10वीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए, आईआईटी करने का मन बनाया। तैयारी शुरू कर दी। बिना कोई कोचिंग कठिन परिश्रम के आईआईटी के लिए चुने गए। विकास का जन्म 21 नवंबर 1979 को बिहार के बीहट बेगूसराय में हुआ था।
विकास वैभव को पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएं भी मिली। वे दुखी भी हुए, लेकिन दिनकर की कविताओं ने उन्हें निराशा से निकलने में बड़ी भूमिका निभाई। खासतौर पर दिनकर की “आशा का दीपक कविता“ ने उनके मन में खास जगह बनाई। यह प्रदीप जो दिख रहा है झिलमिल दूर नहीं, इसी तरह की पत्तियों से वे इतने प्रभावित है कि अपने कार्यालय तक में इसे चस्पा किया हुआ है। निराशा से घिरा व्यक्ति उनके कार्यालय आए तो उसे भी नई प्रेरणा ऊर्जा मिले। कठिन लक्ष्य की प्राप्ति में प्रेरणा की पंक्तियों ने हिम्मत दी।
विकास वैभव बताते हैं कि छुट्टियों में उनके मित्र अपने घरों को जाते थे, लेकिन उनके माता- पिता उन्हें उनके पैतृक निवास बेगुसराय नहीं भेजते थे। स्थिति ये थी कि इस क्षेत्र में पकड़कर शादियां करा दी जाती थी। अपराध अपने चरम पर था। वैभव सोचते थे कि इतने समृद्ध इतिहास वाले उनके क्षेत्र में ये क्या हो रहा है? इसी तरह के सवालों ने उन्हें पुलिस सेवा में आकर बदलाव का अलख जगाने की प्रेरणा दी।
विकास वैभव के दोस्त आईआईटी कर विदेश में अच्छी नौकरी के साथ स्थापित होना चाहते थे, लेकिन वैभव उस समय बिहार के स्वर्णिम इतिहास को देखते हुए वर्तमान की बदहाली के कारणों पर मंथन करते थे। यही वजह रही कि आईआईटी करने के दौरान ही उन्होंने सिविल सर्विस में जाकर बदलाव का अलख जगाने का मन बना लिया था। एक और घटना ने उन्हें बिहार में रहकर स्थिति सुधारने के लिए प्रेरित किया। 1997 में आईआईटी प्रवेश परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र बाहर आ गए। वैभव को इस घटना ने अंदर तक हिला दिया। बुद्ध और जैन धर्म जिस जमीन पर पले-बढ़े, जहां नालंदा- विक्रमशिला विवि थे वहां आज चोरी के प्रश्न पत्र से परीक्षा उत्तीर्ण करने का काम हो रहा है। उन्होंने बिहार को ही कर्मभूमि बनाया और अपने सामने कई बदलाव होते देखे। कई बदलाव के वे खुद वाहक बने।
विकास वैभव भले ही, आईआईटी से इंजीनियरिंग की हो, पुलिस सेवा में हो, लेकिन उनकी इतिहास के प्रति दीवानगी हमेशा से हैं। सभी विषय समय के साथ पीछे छूटे, लेकिन इतिहास बना रहा।यही वजह है कि समय मिलने पर वे इतिहास के पन्नों को खंगालने लगे और उन्हें 2013 से अपने ब्लॉग "साइलेंट पेजेस" पर लिखा। ये काफी प्रसिद्ध व चर्चित हैं। वे अब इसे पुस्तक के स्वरूप में सबके सामने लाना चाहते हैं।
विकास जिस उद्देश्य से पुलिस सेवा में आए थे, रोहतास- बाघाहा जैसे नक्सली क्षेत्रों में शांति बहाली से वह काफी हद तक सफल हुआ। रोहतास की कैमूर पहाड़ी जैस नक्सली क्षेत्र में पहली बार चुनाव कराने का साहस और गौरवपूर्ण काम विकास वैभव ने 2009 में किया। जबकि यहां चुनाव कराने के पहले प्रयास में बीएसएफ की टुकड़ी पर नक्सलियों ने गोलाबारी की थी। चुनाव के दौरान पता चला पूरे क्षेत्र में लैंड माइंस बिछे हुए हैं, लेकिन योजनाबध्द तरीके से शांतिपूर्वक चुनाव कराएं। 50 फीसदी मतदान हुआ। लोगों से चर्चा की और चुनाव- मतदान का बेहतर प्रबंधन किया। इसके बाद यहां बदलाव की बयार बही। लोगों के सहयोग से वहां उग्रवाद का खात्मा किया। दरअसल विकास ने यहां के निवासियों के सामने क्षेत्र के स्वर्णिम इतिहास के पन्ने खोले तो उग्रवाद विकास और लोकतंत्र की और मुड़ गया। वे इस क्षेत्र में बदलाव के दृष्टा और वाहक बने। लोगों में इतने प्रसिद्द हुए कि यहां उनके नाम पर एक गांव में चौराहा का नाम रखा गया। ऑपरेशन विध्वंस से नक्सलियों का खात्मा किया। विकास को उनके उत्कृष्ट कामों के लिए वर्ष 2019 में सत्येंद्र के दुबे मेमोरियल अवार्ड, 2017 में इंटरनल सिक्युरिटी मेडल जैसे कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

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विकास वैभव कभी पुलिस अधिकारी की भूमिका में रहते हैं तो कभी इतिहास तो कभी प्रेरक वक्ता, साहित्यकार। उनका कहना है कि जीवन यात्रा है और कई भूमिकाएं होती है। सबमें समन्वय स्थापित करना जरूरी है। वे कहते हैं पुलिस की सेवा उनकी प्राथमिकता है। इनमें जिस तरह के माहौल में रहते हैं, सोच नकारात्मक हो जाती है। हमेशा पुलिस के पास दुखी और परेशान लोग ही आते हैं। इस तरह के मामले और स्थितियां होती हैं, कि सोच नकारात्मक हो जाती है। ऐसे में इस पेशे को साहित्य, इतिहास से जोड़ दिया जाए तो सकारात्मकता बढ़ जाती है। साहित्य, इतिहास नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है। खुद के साथ साथ आप औरों को भी नई दिशा ऊर्जा दे सकते हैं।
युवाओं के लिए वैभव बताते हैं कि प्राथमिकताएं तय करें।जो सबसे महत्वपूर्ण हैं, उसे प्राथमिकता दें। इससे आप तय कर पाएंगे कि किस के लिए अधिक चिंता करना। वे कहते हैं कि अच्छे विचारों का प्रवाह आने दें। जीवन में सकारात्मकता रखें। अपनी क्षमताओं पर भरोसा बनाए रखें तो सफलता अवश्य मिलेगी।
विकास का कहना हैं कि युवाओं को खुद में उद्यमिता की भावना लाना होगी। अपनी सोच नौकरी तक ही सीमित न रखें। अपने इतिहास को आगे रखकर सोचेंगे तो पता चलेगा हम किनके वंशज हैं और क्या कर सकते हैं? हमें अभी कितना करना बाकी हैं। खुद को संकुचित न बनाएं। जीवन यात्रा में अच्छा और बुरा समय आएगा, लेकिन धैर्य बनाकर चलें तो सफल होंगे। बिहार को लेकर विकास कहते हैं, यह ज्ञान की भूमि हैं। शिक्षा के पतन को रोकना होगा। उच्च शिक्षा में बेहतर बहाल करना होगा।
  • 1 जनवरी 2021 से महानिरीक्षक के रूप में पदोन्नत।
  • मानव मूल्यों के लिए सर्वोच्च व्यावसायिक ईमानदारी के लिए IIT कानपुर द्वारा उच्च प्रतिष्ठित सत्येंद्र के दुबे मेमोरियल अवार्ड 2019 से सम्मानित|
  • जनवरी 2017 में भारत की आंतरिक सुरक्षा के प्रति कर्तव्यों के लिए आंतरिक सुरक्षा पदक से सम्मानित किया गया |
  • पुलिस की गतिविधियों के लिए DGP, बिहार द्वारा कई प्रशंसाएँ, IM की गतिविधियों की जांच के लिए DG, NIA द्वारा प्रतिबंध|
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